छह ऋतुएँ बारी-बारी से
यहां पर आती जाती रहती हैं
साल के कुछ महीने जहां पर
नदिया भी सूखी रहती हैं
बसंत से पहले का मौसम भी
मार पतझड़ की सहता है।
पर राजनीति का मौसम यहां तो हरा भरा ही रहता है।।
गाय, गंगा या मंदिर हो
सब राजनीति के धंधे हैं ये
जनता की गर्दन फंसी रहे
ऐसे अदृश्य फंदे हैं ये
वोटर चुप रहकर के
जिनके जुल्रम ये सारे सहता है।
पर राजनीति का मौसम यहां तो हरा भरा ही रहता है।।
राजनीति का धंधा यारों
सब धंधों में अच्छा है
नेता झूठा हो या सच्चा
खाता कभी नहीं गच्चा है
ऐसा यह व्यापार है भाई
इसमें कभी नहीं किसी का घाटा है
दुनिया के मन्दे हो चाहे सब धंधे
पर यह धंधा है जो
मंदा कभी नहीं सहता है।
राजनीति का मौसम यहां तो हरा भरा ही रहता है।।
वोट मांगने आते जब नेताजी
खूब लल्लो चप्पो करते हैं
हाथ जोड़ते लोगों के और फिर
पैरों में गिर पड़ते हैं
जीतकर इलेक्शन आते जब
नेताजी बनकर मंत्री जी
जनता बेचारी धूल फांकती
बनी रह जाती संत्री जी
सालों साल दरवाजे पर
वोटर ही दस्तक देता है।
राजनीति का मौसम यहां तो हरा भरा ही रहता है।।
पाँच साल के शासन से ही
जनता उबने लगती है
इनके तिरछे चाल चलन से
देश की नैया डूबने लगती है
छोड़ कर अपने हाल पर जनता को
यह तो विदेश हो आते हैं
बैठकर महंगे एरोप्लेन में
यह तो खूब इतराते हैं
फिर नहीं यह आने पाए दोबारा
सारा जनमत ही कहता है।
राजनीति का मौसम यहां तो हरा भरा ही रहता है।।
- सन्दीप कुमार सचेत
मौहल्ला आलम सराय,
जिला : सम्भल (उत्तर प्रदेश)
सम्पर्क सूत्र : 9720668282

बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंधन्यबाद
हटाएंAwesome poem
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