गुरुवार, 21 जनवरी 2016

नरेन्द्र मिश्रा का गीत : मुस्कुराना सीख लें

मुस्कुराना सीख लें


चलो आओ फिर
मुस्कुराना सीख लें...

छोटी है ज़िंदगी 
बड़ी है चाहतें, 
ख्वाब है बहुत 
कम है राहतें,
उन सपनों को अपना 
बनाना सीख लें... 
चलो आओ फिर
मुस्कुराना सीख लें...

हर कदम पर 
टोकती मुश्किलें, 
कदम कदम को 
रोकती मुश्किलें,
उन मुश्किलों के पार
जाना सीख लें...
चलो आओ फिर
मुस्कुराना सीख लें... 

ना तब था, 
ना अब है, 
यहां कौन अपना
कब है ?
इन अंजानों को अपना 
बनाना सीख लें...
चलो आओ फिर 
मुस्कुराना सीख लें...

रह गए अकेले
यूं बीच रास्ते,
ना रुका कोई
हमराह के वास्ते
एक एक ही सही,
कदम बढाना सीख लें...
चलो आओ फिर
मुस्कुराना सीख लें...

नरेन्द्र मिश्रा
रायपुर
सम्पर्क सूत्र : 93018 31287‬

युवा रचनाकार  पंकज कुमार "दक्ष की कविता : प्रताप

प्रताप


न वो रहे न उनकी बाते
रह गये किस्से उनके वीरता की सौगाते

जिस्म था लोहे सा बना
वाणी मे हुंकार
कभी न डरा दुश्मनो से
करता रहा वार पे वार

राणा के प्रताप से
दुश्मन था भागा
वह वीर योद्धा 
माता का था रखवाला

प्राण चले जाये मगर
देश न जाने देता था
भारत का वो रखवाला
महाराणा प्रताप कहलाता था

दुश्मन थर -थर काप गये
उसकी तलवारो की धार से।
जीवन के कठिन समय मे 
कभी नही भय भीत हुआ
वह और कोई नही
महाराणा प्रताप था।
          
      पंकज कुमार "दक्ष"
      कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश
     सम्पर्क सूत्र :  08115759834
                

बुधवार, 20 जनवरी 2016

विजय कुमार पुरी का गीत : हरे भरे पेड़ों से सजता सुंदर ये परिवेश है

हरे भरे पेड़ों से सजता सुंदर ये परिवेश है



प्यारी अपनी धरती है और प्यारा अपना देश है।
हरे भरे पेड़ों से सजता सुंदर ये परिवेश है।।

                       
कुछ लोग यहाँ पर ऐसे हैं, जो धरती को गन्दा करते हैं,
उनकी करनी धरनी से भई, वन्य जीव सब मरते हैं,
उनकी रक्षा करना ही सब धर्मों का सन्देश है।
हरे भरे पेड़ों से सजता सुंदर ये परिवेश है।।

                      
गिद्ध और कौए हमसे कहते, हम धरा की शान हैं,
प्रदूषण को कम हैं करते, न इससे तुम अनजान हैं,
मत ऐसा व्यवहार करो कि लगे हमें परदेस है।
हरे भरे पेड़ों से सजता सुंदर ये परिवेश है।।

                    
यहाँ देख के कूड़ा कचरा, अपना जी भर आया है,
बहुत कोशिशें कर लीं लेकिन, सब कुछ न हो पाया है,
कुछ तो अच्छा करना सीखो, नवयुग में प्रवेश है।
हरे भरे पेड़ों से सजता सुंदर ये परिवेश है।।

                    
सब झूम झूम कर गाएंगे, हम पर्यावरण बचाएंगे,
धरती के श्रृंगार के लिए हम पेड़ और पौधे लगाएंगे।
जन जन में है जाग उठा ये नया नया उन्मेष है।
हरे भरे पेड़ों से सजता सुंदर ये परिवेश है।।

                    
वृक्ष धरा के भूषण हैं और इनसे जीवन मिलता है,
सुंदर निर्मल स्वच्छ धरा पर सब का ही मन खिलता है,
रंग रंगीले फूलों से अब बदला धरा ने भेष है।
हरे भरे पेड़ों से सजता सुंदर ये परिवेश है।।


विजय कुमार पुरी 
पालमपुर, जिला कांगड़ा,
हिमाचल प्रदेश
सम्पर्क सूत्र : 09816181836,
 09459346550

बुधवार, 13 जनवरी 2016

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